गायब हो गया चीफ इंजीनियर का हाईटेक दफ्तर, हाईकोर्ट में सुनवाई 16 को

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FARIDABAD NEWS (CITYMAIL NEWS ) नगर निगम फरीदाबाद के चीफ इंजीनियर को लेकर शुरू हुआ विवाद हाईकोर्ट में लंबित है, वहीं दूसरी ओर निगम मुख्यालय से अब उनका दफ्तर भी गायब हो गया है। चीफ इंजीनियर डी.आर.भास्कर द्वारा अपने लिए विशेष तौर पर बनाए गए दफ्तर को निगम के अतिरिक्त आयुक्त ने अपना कार्यालय बना लिया है।
इससे पहले अतिरिक्त आयुक्त को नगर निगम में छोटा सा कार्यालय दिया गया था। यह कार्यालय भी पहले प्लानिंग ब्रांच के एसटीपी के पास था। एसटीपी सतीश पाराशर के निलंबन के समय उनका दफ्तर अतिरिक्त आयुक्त को दे दिया गया था। पंरतु अतिरिक्त आयुक्त देवेद्र खटखटा (आई.ए.एस. अधिकारी) को यह दफ्तर पसंद नहीं आया।
हालांकि नगर निगम में उनकी नियुक्ति से पहले इस पद पर एच.सी.एस. अधिकारी सुरेंद्र सिंह नियुक्त थे। वह एसटीपी वाले दफ्तर से ही अपना काम चला रहे थे। लेकिन आई.ए.एस.अधिकारी देवेंद्र खडखटा पदभार ग्रहण करने के साथ ही निगम मुख्यालय में किसी अन्य व बड़े दफ्तर को पसंद करना चाह रहे थे।
इस बीच चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर का सरकार ने करनाल नगर निगम में तबादला कर दिया एवं उनके स्थान पर निगम के एस.ई.रमन शर्मा को चीफ इंजीनियर के पद पर प्रमोशन देकर यही नियुक्त कर दिया ।
लेकिन यह दूसरी बात है कि भास्कर ने अपने तबादले एवं रमन शर्मा की प्रमोशन के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे आर्डर ले लिया। फिलहाल भास्कर द्वारा लिए गए स्टे आर्डर पर लगातार सुनवाई हो रही है। हाईकोर्ट ने पिछली 10 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई की थी। स्टे पर दोनों पक्षों की बहस भी लगभग पूरी हो चुकी है। इस पर अब हाईकोर्ट का फैसला आना बाकि है, इस मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट में 16 अक्टूबर को होनी है। संभतवय: इस तिथि पर चीफ इंजीनियर विवाद में हाईकोर्ट का निर्णय आ सकता है।
दूसरी ओर नगर निगम इस समय बिना चीफ इंजीनियर के चल रहा है और अब तो उनका दफ्तर भी अतिरिक्त आयुक्त के पास है। जबकि इस दफ्तर को डी.आर.भास्कर ने लाखों रुपए खर्च करके विशेष तौर पर अपने लिए बनवाया था। इस दफ्तर में बेहतरीन सजावट के साथ साथ एक चीफ इंजीनियर स्टॉफ के बैठने के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी। किचन के साथ साथ चीफ इंजीनियर कार्यालय में सीसीटीवी कैमरों की भी व्यवस्था थी। इसके अलावा भास्कर द्वारा अपने कार्यालय में गोपनीय बैठक के लिए दफ्तर के भीतर ही एक ड्राईंग रूम तैयार करवाया गया था। इस एयर कंडीशन दफ्तर पर सरकारी खर्च से लाखों रुपए लगाए गए थे। पंरतु अब यह दफ्तर अतिरिक्त कमिश्नर के पास रहेगा।

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