हाईकोर्ट से नगर निगम को झटका,प्लाट नंबर 49 का सीएलयू रद्द करने के आदेश

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FARIDABAD NEWS (CITYMAIL NEWS ) सीएलयू प्रकरण में नगर निगम एवं राज्य सरकार को आज हाईकोर्ट में जोर का झटका लगा है। राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट में फरीदाबाद के लिए बनाई गई सीएलयू नीति वापिस लेने के बावजूद प्लाट नंबर 49 नीलम बाटा रोड का सीएलयू करना मंहगा पड़ गया। हाईकोर्ट ने के.एल.गेरा की याचिका नंबर सीओपी-840/ 2018 पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को प्लाट नंबर 49 नीलम बाटा रोड फरीदाबाद का सीएलयू कैसिंल करने के मौखिक आदेश जारी किए हैं।

इस याचिका की अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2018 को होनी है। इस डेट पर राज्य सरकार के लोकल बॉडी विभाग को प्लाट नंबर 49 का सीएलयू रद्द कर हाईकोर्ट को अवगत करवाना होगा। याचिकाकर्ता के.एल.गेरा ने इस मामले में लोकल बॉडी हरियाणा के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण को अवमानना का आरोपी बनाया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि श्री शरण ने प्लाट नंबर 49 के सीएलयू को सही ठहराते हुए नगर निगम के एसटीपी सतीश पाराशर को क्लीन चिट दी थी। जिसके आरोप में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर श्री शरण को अवमानना का आरोपी बनाया था।

याचिकाकर्ता गेरा के अनुसार राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में सीएलयू पॉलिसी वापिस ले ली थी। इसके बावजूद वर्ष 2016 में नगर निगम के प्लानिंग विभाग ने प्लाट नंबर 49 का सीएलयू कर दिया। जबकि उक्त प्लाट के साथ साथ निगम के पास सीएलयू के सैंकड़ों आवेदन थे। मगर प्लाट नंबर 49 का ही सीएलयू जारी किया गया। इस भेदभाव को लेकर अनेक लोगों ने सरकार से नगर निगम के प्लानिंग विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए शिकायत की थी।

इस संदर्भ में हरियाणा व्यापार मंडल ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर नगर निगम के प्लानिंग विभाग की शिकायत की थी। इसके साथ साथ सीएम विंडो पर भी इस संदर्भ में शिकायत दायर की गई थी। लेकिन लोकल बॉडी के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण ने जांच करने के बाद उक्त सीएलयू को उचित ठहराते हुए नगर निगम के एसटीपी को क्लीन चिट दे दी थी। इतना सब होने के बावजूद बुधवार को हाईकोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई हुई तो सरकार को मायूसी हाथ लगी।
नगर निगम की ओर से भी प्लानिंग विभाग के एक अधिकारी को जरूरी दस्तावेज लेकर चंडीगढ़ भेजा गया था।

याचिकाकर्ता केएल गेरा का कहना है कि 30 अप्रैल को इस मामले की अगली सुनवाई होनी है। इस तिथि पर सरकार द्वारा प्लाट नंबर 49 का सीएलयू रद्द करके हाईकोर्ट में अपना जवाब दायर करना होगा। इस मामले में लोकल बॉडी के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क किया गया। लेकिन उन्होंने फोन पिक नहीं किया। इसलिए उनका पक्ष नहीं लिया जा सका। वहीं याचिकाकर्ता केएल गेरा ने बताया कि फरीदाबाद में रिहायशी प्लाटों पर व्यवसायिक गतिविधियां चलाने वाले संस्थानों पर जल्द ही सीलिंग की कार्रवाई होगी। उनकी याचिका में यह मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट इस मुद्दे पर पूरी तरह से गंभीर है।

जांच में गलत पाया गया था यह सीएलयू

नगर निगम की तत्कालीन आयुक्त सोनल गोयल ने प्लाट नंबर 49 को सीएलयू देने की शिकायत पर एचसीएस अधिकारी एवं तत्कालीन ज्वाइँट कमिशनर महावीर प्रसाद से जांच करवाई थी। इस जांच में इस सीएलयू को ना केवल भ्रष्टाचार के दायरे में रखा गया था, बल्कि एसटीपी सतीश पाराशर को दोषी भी माना गया था। इस जांच रिपोर्ट को आयुक्त सोनल गोयल ने लोकल बॉडी के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण के पास उचित कार्रवाई के लिए भेजा था, मगर वह इस रिपोर्ट को दबाकर बैठ गए थे।

रेवड़ी की तरह से बांट रहे हैं सीएलयू

नगर निगम का प्लानिंग विभाग रेवडिय़ों की तरह से अवैध रूप से सीएलयू बांट रहा है। हाल ही में नगर निगम ने अरावली वन प्रतिबंधित क्षेत्र में भी चार फार्म हाऊस को मैरिज गार्डन बनाने के लिए गैरकाूननी तरीके से सीएलयू आवंटित किया है। यह मुद्दा भी सरकार के लिए गले की फांस बन सकता है। दरअसल नगर निगम की प्लानिंग विभाग का एक अधिकारी अपनी करतूतों की वजह से राज्य सरकार के लिए हर कदम पर मुसीबत खड़ी कर रहा है। परंतु सब कुछ जानते हुए भी नगर निगम के बड़े अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

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