सैनिकों के बच्चों की पढाई सभी खर्च सीमाओं को हटाने की मांग

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New Delhi News (Citymail News)  रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्रालय से शहीद के बच्चों की फीस पर लगी कैपिंग को हटाने की मांग की है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्रालय के खत लिखकर अपील की है कि शहीद सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई के खर्च पर अधिकतम 10 हजार रुपये महीने की लगी पाबंदी हटाई जाए। रक्षा मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार शहीद सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई के खर्चे पर लगी कैपिंग के सभी पहलूओं के अध्ययन और तीनों सेनाओं के लोगों से इस बार में हुई चर्चा के बाद रक्षा मंत्री ने कैपिंग को हटाने का इरादा तय कर लिया। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद निर्मला सीतारमण ने वित्तमंत्री अरुण जेटली से इस मसले पर चर्चा कर कैपिंग हटाने का अनुरोध किया। सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्री की वित्तमंत्री से हुई चर्चा के बाद रक्षा मंत्रालय ने भी फीस कैपिंग हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय को लिखित अनुरोध भी भेज दिया है। चूंकि रक्षा मंत्रालय अपनी ओर से फीस कैपिंग के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ा सकता और वित्त मंत्रालय को ही इस बारे में प्रस्ताव लाना है। सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के शीर्ष स्तर पर हुई पहल और व्यापक चर्चा के बाद उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय जल्द ही फीस कैपिंग हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे देगा। आपको बता दें कि युद्ध या मोर्चे पर शहीद सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई पर खर्च की यह कैपिंग 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद पिछले साल की गई। इसका शहीद सैनिकों के परिजनों के साथ तमाम पूर्व सैनिकों की ओर से कड़ा विरोध जताया गया। तीनों सेनाओं की ओर से भी सरकार से इस कैपिंग को हटाने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया।
हालांकि इसके बाद भी वित्त मंत्रालय और फिर रक्षा मंत्रालय ने दो टूक साफ कर दिया कि वेतन आयोग की सिफारिशें के मद्देनजर कैपिंग हटाने की गुंजाइश नहीं है। कैपिंग से पहले शहीदों के बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल फीस के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं थी। मगर कैपिंग के बाद शहीदों के करीब 3000 बच्चों पर इसका असर पड़ा है। सैन्यकर्मियों और उनके परिवारजनों में इस मामले से जुड़े संवेदनशील पहलूओं को देखते हुए रक्षा मंत्री ने अंतत: कैपिंग हटाने का सैद्धांतिक निर्णय ले लिया है। अब कैपिंग हटाने पर रक्षा मंत्रालय को वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है।

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