किसी ने बहुत खूब कहा है – बेशक गुर्जर की चक्की धीमी चलती है, लेकिन जब चलती है तो बारीक पीसती है

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FARIDABAD NEWS ( CITYMAIL NEWS ) कृष्णपाल की चक्की बेशक धीमी चलती है, लेकिन जब चलती है तो बिल्कुल बारीक पीसती है। जी हां प्रशासनिक व राजनैतिक हल्कों में आजकल केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर की कार्यप्रणाली व वाकपटुता को लेकर केवल यही चर्चा है। सूरजकुंड व प्लाट नंबर 49 नीलम बाटा रोड पर गैरकानूनी तरीके से किए गए सीएलयू पर सरकार व संगठन की बदनामी को देखते हुए केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने तीखा स्टैंड लिया है। उन्होंने इस मुद्दे को पहले बारीकी से परखा और तत्काल मुख्यमंत्री से बात करके नगर निगम के एसटीपी सतीश पाराशर को निलंबित करवाने के आदेश जारी करवाए।

श्री गुर्जर ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को इस मुद्दे पर सारी बात विस्तारपूर्वक बताई। दरअसल श्री गुर्जर के पास नगर निगम के एसटीपी सतीश पाराशर की लगातार ऐसी शिकायतें पहुंच रही थीं, जिससे सरकार व संगठन को खासी किरकिरी का सामना करना पड़ रहा था। बात चाहे सीएलयू की हो या फिर सैनिक कालोनी सैक्टर 49 को नगर निगम के अधीन करवाने की। हर मुद्दे पर सतीश पाराशर ने सरकार को नीचा दिखाने का प्रयास किया है। सैनिक कालोनी के मुद्दे पर तो नगर निगम सदन में सतीश पाराशर ने कमिश्नर सहित मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर व सभी पार्षदों को ठेंगा दिखा दिया था।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल स्वयं विधायक सीमा त्रिखा द्वारा आयोजित जनसभा में सैनिक कालोनी को नगर निगम के अधीन करने की घोषणा कर चुके थे। पंरतु एसटीपी सतीश पाराशर ना जानें क्यों खुद को मुख्यमंत्री से भी बड़ा समझते हुए सैनिक कालोनी को नगर निगम के अधीन नहीं होने देना चाह रहे थे। हालांकि बाद में केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर , विधायक सीमा त्रिखा, चेयमरैन धनेश अदलक्खा व डिप्टी मेयर मनमोहन गर्ग के हस्तक्षेप पर कमिश्नर मोहम्मद शाईन ने बोल्ड स्टैप लेते हुए सैनिक कालोनी को नगर निगम के अधीन करने के आदेश जारी कर दिए। यह दूसरी बात है कि सैनिक कालोनी सोसायटी ने मुख्यमंत्री की घोषणा को ठेंगा दिखाते हुए कालोनी के टेकओवर आदेश पर स्टे के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है।

नगर निगम के एसटीपी सतीश पाराशर की कार्यप्रणाली की कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। निगम का अधिकांश स्टॉफ उनके खिलाफ है। पंरतु प्रशासनिक डर की वजह से कोई मुंह नहीं खोलता। पाराशर की कार्यप्रणाली देखो कि इतने बड़े पद पर रहते हुए भी वह एक चपरासी स्तर के अधिकारी से भिडऩे में भी अपनी शान समझते हैं। निगम में उनके खिलाफ शिकायतों के ढेरों पुलिंद पड़े हैं। पाराशर की कार्यप्रणाली व बदजुबानी का ही कमाल है कि तत्कालीन निगम आयुक्त सोनल गोयल भी उनके खिलाफ सरकार को कई बार शिकायत देकर कार्रवाई की मांग कर चुकी थीं। लेकिन हर बार लोकल बॉडी महकमें में बैठे अपने आकांओं की वजह से वह बचते रहे हैं। सतीश पाराशर के पास सरकारी कामों से जाने वाले लोगों को भी उनसे मुलाकात के बाद बेहद कड़वे अनुभव से गुजरना पड़ा है।

आम लोगों को परेशान करना उनकी फितरत में शामिल हो चुका था। नगर निगम में काम करवाने के लिए जाने वाले लोग जब परेशान हो जाते तो वह सरकार को कोसने लगते थे। ऐसी तमाम शिकायतें जब रोज रोज केंद्रीय मंत्री के पास पहुंचने लगी तो वह भी सरकार की बदनामी को देखकर परेशान हो गए थे।
अंतत: जब हाईकोर्ट ने सीएलयू कांड पर अपने आदेश जारी किए और सूरजकुंड के अवैध फार्म हाऊसों को सीएलयू देने का मुद्दा उन्होंने समझा तो वह अपनी आंख बंद नहीं रख पाए। हालांकि यह दुखद पहलू है कि जिस बडख़ल क्षेत्र की छाती पर इतने बड़े कांड की पटकथा लिखी गई है, वहां की विधायक सीमा त्रिखा चुप्पी साधे हुए है।

विधानसभा कमेटी का अध्यक्ष रहते सूरजकुंड रोड पर अवैध फार्म हाऊसों पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी करने वाले विधायक मूलचंद आंखों में सूरमा डाले बैठे हैं। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल भी जानबूझकर अंजान बने रहे। लेकिन केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने हस्तक्षेप करते हुए प्रथम चरण में इस मुद्दे पर सख्त रूख दिखाया और इस कांड के मुख्य आरोपी को मुख्यमंत्री से आदेश करवाकर सस्पैंड करवा दिया। इस संदर्भ में औपचारिक आदेश जारी होने हैं।

लेकिन यह भी तय है कि श्री गुर्जर इस मामले की जांच स्टेट विजिलेंस से करवाने पर अड़ गए हैं। उन्होंने साफ कह दिया है कि इस कांड में जो भी अधिकारी दोषी होंगे, उन पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई जाएगी। श्री गुर्जर का कहना है कि कुछ अधिकारी अपनी करतूतों से सरकार को बदनाम कर रहे हैं। इसलिए उनकी प्रशासन के सभी अधिकारियों से अपील है कि वह जनता को परेशान करने की बजाए उनकी सेवा करें। श्री गुर्जर ने कहा कि उनके पास जिस भी अधिकारी की शिकायत आएगी, वह उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई अवश्य करवाएंगे।

केंद्रीय मंत्री के अंदाज को देखकर किसी ने अपने शायराना अंदाज में खूब कहा है कि बेशक गुर्जर की चक्की धीमी चलती है, लेकिन जब चलती है तो बारीक पीसती है।

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