रणनीति 2019- आंतरिक सर्वे : भाजपा के लिए बुरी खबर, 152 सांसदों से नाराज है जनता

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NEW DELHI NEWS (CITYMAIL NEWS ) भाजपा के आंतरिक सर्वे में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। 2014 में पार्टी ने जिन 282 सीटों पर जीत दर्ज की थी, उनमें से 152 संसदीय क्षेत्रों में रिपोर्ट सांसदों के खिलाफ आई है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने अपनी जीती हुई सभी सीटों पर आतंरिक सर्वेक्षण करवाया है। भाजपा के एक रणनीतिकार के मुताबिक यह सर्वे पिछले साल गुजरात चुनाव से ठीक पहले आ गया था। लेकिन इस रिपोर्ट की संवेदनशीलता की वजह से इस पर पार्टी ने आगे कोई कदम नहीं बढ़ाया। एहतियातन पार्टी ने सर्वे के दूसरे चरण पर काम शुरू कर दिया है। इस चरण में नाराजगी वाली सीटों पर स्थिति सुधारने के उपाय समेत वैकल्पिक उम्मीदवारों के नाम भी मंगाए गए हैं। इस रणनीति के तहत ही 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए मोदी-शाह की जोड़ी ने न्यू इंडिया-यंग इंडिया का खाका बुन लिया है। दिल्ली के नगर निगम चुनाव में सभी मौजूदा पार्षदों की जगह नए चेहरे उतारने का सफल प्रयोग पार्टी द्वारा किया जा चुका है।
इसी तरह से पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में सत्ता विरोधी लहर वाली सीटों पर मौजूदा विधायकों की टिकट काटने में भी पार्टी ने कोई नरमी नहीं बरती है। इसलिए भाजपा आलाकमान और संघ परिवार ने अब तीसरी पीढी का नेतृत्व उभारने की दूरगामी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। उज्जैन में संघ प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाहक भैयाजी जोशी के साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की मुलाकात में तीसरी पीढी को लेकर चर्चा हुई थी। अब भाजपा ने 2019 के चुनाव के लिए कुछ कड़े मापदंड अपनाने का मन बनाया है। जिसमें 75 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को मोदी सरकार में मंत्री नहीं बनाने के फामूर्ले की तर्ज पर ही लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाने पर भी प्रमुखता से विचार किया जा रहा है।

75 साल की जद में आएंगे ये बड़े चेहरे

नेता- लालकृष्ण आडवानी, मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र, सुमित्रा महाजन,बीसी खंडूरी, भगत सिंह कोश्यारी आदि।

रिपोर्ट में सामने आया है कि कितने सांसदों से नाराज हैं लोग
राज्य                 कुल भाजपा सांसद                          नाराजगी वाली सीटें

उत्तर प्रदेश                71                                        48
मध्यप्रदेश                  26                                       16
राजस्थान                  25                                        13
महाराष्ट्र                   23                                        17
बिहार                      22                                        12
झारखंड                    12                                        05
हरियाणा                   07                                        07
उत्तराखंड                  05                                        03
पंजाब                       02                                        02
चंडीगढ़                      01                                        01
अन्य राज्य                  87                                        28

 

इन राज्यों पर है भाजपा की पैनी नजर

2019 में भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा हैं ओडिसा, आंधप्रदेश, तेलगंाना और प.बंगाल । इन राज्यों की 105 लोकसभा सीटों पर भाजपा की नजर है। ये वो क्षेत्र हैं, जहां 2014 में मोदी लहर के बावजूद भाजपा को मात्र 6 सीटें हासिल हुई थीं। अब रणनीति यहां की 80 सीटें जीतने की हैं। इन राज्यों में ओडिशा को छोडक़र भाजपा का संगठनात्मक ढांचा कमजोर है। इसलिए शाह की रणनीति मोदी की लोकप्रियता को भुनाने की है। माना जा रहा है कि 2019 में मोदी को वाराणासी के साथ पुरी लोकसभा सीट से भी उतारने की रणनीति पर भाजपा काम कर रही है। दरअसल इस संभावना को दो कारणों से बल मिला है। एक 15 अप्रैल 2017 को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेने जब मोदी भुवनेशवर पहुंचे थे तो पार्टी की ओडिशा इकाई के नेताओं ने उन्हें पुरी से चुनाव लडऩे का प्रस्ताव दिया था। दूसरी इसी साल 26 मई को भाजपा के चार साल के जश्र के लिए जब मोदी की कटक में रैली हुई तो उसे भी इससे ही जोडक़र देखा गया। हालांकि इस मामले में अमित शाह से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी कुछ तय नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री के कहीं जाने से यह नहीं सोचना चाहिए कि वह वहां से चुनाव लड़ेंगे। पंरतु देखना अब यह है कि जिस प्रकार से भाजपा सरकार के प्रति लोगों में नाराजगी बढ़ रही है, उस सूरत में मोदी व शाह की जोड़ी पर अपनी सरकार को पुन: अस्तित्व में लाने की बड़ी चुनौती होगी।

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