गर्भवती महिला को अस्पताल से बाहर निकालने पर सख्त हुआ मानव अधिकार आयोग

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CHANDIGARH NEWS (CITYMAIL NEWS ) सरकारी हस्पताल में गर्भवति महिलायों को इलाज व सुविधा की जगह बाहर निकाले जाने और उसका खुले में प्रसव होने के गुरुग्राम के एक मामले को हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग को श्रीधर मओहली द्वारा फरवरी माह में भेजी गई शिकायत में अखबार की खबरों के आधार पर हस्पताल प्रशासन व चकित्साको पर लापरवाही का आरोप लगाया था जिस पर आयोग ने मुख्य  चिक्तिस्य अधिकारी गुरुग्राम से तथ्य आधरित रिपोर्ट मांगी थी।
पेश की गई रिपोर्ट में मुख्य चिकितस्य अधिकारी ने बताया कि उक्त शिकायत की जांच के बाद दो कर्मचारी ममता व मनोज की सेवायों को निरस्त कर दिया गया था परंतु उपायुक्त गुरुग्राम के निर्देश पर उन दोनो के अनुबंध को दोबारा से नवीनीकरण कर दिया गया जिस पर आयोग के चेयरमैन माननीय न्यायमूर्ति  सतीश कुमार मित्तल व  मेम्बर  दीप भाटिया ने नाराजगी व्यक्त  की तथा उपायुक्त व मुख्य चिकितस्य अधिकारी गुरुग्राम को अपना जवाब शपथ पत्र के माध्यम से देने को कहा है। आयोग ने इसे महिला की अस्मिता के साथ खिलवाड़ माना है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी 2018 को होगी।
एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान न्याय मूर्ति  सतीश कुमार मित्तल चेयरमैन व न्यायमूर्ति  के सी पूरी की खंडपीठ ने गरीबो को दिए जाने वाले बी पी एल कार्ड के एक पानीपत के मामले की सुनवाई करते हुए पानीपत प्रशासन को लताड़ लगाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि उपायुक्त कार्यालय के कर्मचारी गरीबो के बी पी एल कार्ड के विषय मे कोई रुचि नही ले रहे है तथा उपायुक्त ने स्वयं भी अपने दिए हुए वचन की पालन नही की है। हरियाणा  मानव अधिकार आयोग गरीबो के बी पी एल कार्ड के मुद्दे पर अतंयन्त गंभीर है तथा सरकार द्वारा बनाई गई गरीबो के लाभ के लिये नितियों का जमीनी स्तर पर क्रियान्वन न होने पर अपनी नाराजगी कई बार प्रकट कर चुका है। आयोग  प्रशासन के कर्मचारियों द्वारा गरीबो को बी पी एल कार्ड जारी करने में देरी को मानव अधिकार की अवहेलना मानता है।

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