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चुनावी चर्चा: फजीहत के डर से भागे भागे फिर रहे हैं मंत्री जी


अपनी पार्टी के प्रत्याशी को छोडक़र एक मंत्री जी आजकल पूरे देश के भ्रमण पर हैं। अपनी पूरी टीम को कांग्रेस के समर्थन में झोंककर मंत्री जी देश के दौरे पर निकल लिए। वैसे भी इस मंत्री को आजकल अपनी ही पार्टी में कोई नहीं पूछ रहा। नामांकन के समय भी डीलर से लीडर बने इस मंत्री को पार्टी प्रत्याशी ने बुलाया तक नहीं। हालांकि वह मौके पर पहुंंच गया, इसके बावजूद उन्हें वहां प्रत्याशी ने बात करना तो दूर घास तक नहीं डाली। पार्टी प्रत्याशी को भली भांति पता है कि सांप को चाहे कितना दूध पिलाओ, मगर वह उगलेगा जहर ही। इस प्रत्याशी महोदय ने आस्तीन के सांप को उसके भरोसे छोड़ दिया है।

यह भी याद रखने वाली बात है कि आजकल इस मंत्री पर उसका चेला भारी पड़ रहा है। जैसा इस मंत्री ने अपने गुरू के साथ किया, वैसा ही आजकल उसे भी भुगतना पड़ रहा है। मंत्री ने अपने जिस चेले को पार्षद बनाकर नगर निगम में कुर्सी पर बिठाया, अब वहीं राजनैतिक चेला अपने मंत्री गुरू के लिए सिरदर्द बन गया है। प्रतिष्ठित परिवार व बड़े औद्योगिक घराने से ताल्लुक रखने वाला यह चेला अपने अच्छे चाल चलन की वजह से क्षेत्र में लोगों का दुलारा बनने लगा है। ऊपर से एक बड़े नेता ने उसे अपना आर्शीवाद देकर राजनीति की सीढिय़ों पर चढऩे का मंत्र भी समझा दिया है। दरअसल नेताजी ने अपने ही चेले को शिकस्त देने के लिए एक और चेले को अपना हाथ थमा दिया है। यही वजह है कि मंत्री का शार्गिद अपने ढोंगी गुरू का चोला उतारकर अब नेताजी के गुणगान गाता दिखाई देता है।

उसे समझ में आ गया कि नकली गुरू की छत्रछाया से निकल कर असली गुरू के आंगन में बैठकर ही वह राजनीति की सफलता प्राप्त कर सकता है। अपने चेले के बढ़ते कद से ड्रामेबाज मंत्री भीतर ही भीतर परेशान हैं। ऊपर से उसे चुनावी मौसम में कोई पूछ नहीं रहा। पार्टी प्रत्याशी का दावा है कि अपने चेले के क्षेत्र से उससे भी अधिक वोटों से जीत हासिल करेंगे। इसलिए उसे नकली लोगों की जरूरत नहीं, जोकि दोस्ती की आड़ में पीठ में छुरा घोंपने का काम करते हैं। नेताजी जी का यह भी मानना है कि पराए धन को ठगकर राजनीति में घुसने वालों की असलियत लोग जान चुके हैं। ठगगू भाई अपने खिलाफ बनते माहौल से रात दिन चितिंत है। यही वजह है कि चुनाव-वुनाव छोडक़र आजकल वह मारे मारे फिर रहे हैं। । चलो यह भी अच्छा है कि नंगा होने से तो बेहतर तन पर कपड़े ढंके रहना है।

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