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Friday, February 28, 2020

फरीदाबाद में बड़ा उद्योग बना अवैध निर्माण का काला धंधा, कमिश्नर की भूमिका संदेह के दायरे में ?


Faridabad News (citymail news ) अवैध निर्माण तोडऩे गए नगर निगम अधिकारियों के बीच सरेआम सडक़ पर हाथापाई होने से साबित हो गया है कि फरीदाबाद में यह काला धंधा कितना बड़ा आकार ले चुका है। नगर निगम अधिकारियों के लिए अवैध निर्माण दो नंबर की कमाई करने वाला उद्योग बन गया है। अवैध निर्माणों से लाखों रुपए की उगाही करने का पर्दाफाश हो गया है। तीन नंबर में जिस तरह से नगर निगम के दो बिल्डिंग इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी आपस में भिड़ गए, वह किसी शर्मनाक घटना से कम नहीं है। अधिकारी किस प्रकार से अवैध निर्माणों से लाखों रुपए की उगाही कर अपने उच्च अधिकारियों को पहुंचा रहे हैं, उपरोक्त मामला इसका जीता जाता उदाहरण है।
वीरवार की दोपहर को तीन नंबर में बीकानेर स्वीटस के सामने सरेआम अवैध रूप से बन रहे एक बड़े शापिंग मॉल को तोडऩेे के लिए बिल्डिंग इंस्पेक्टर सुमेर सिंह अपनी टीम के साथ गए थे। जैसे ही सुमेर सिंह ने तोडफ़ोड़ की कार्रवाई शुरू की, तभी मौके पर एनआईटी क्षेत्र का बिल्डिंग इंस्पेक्टर महेंद्र रावत पहुंच गया। महेंद्र ने उक्त अवैध निर्माण को ना तोडऩे के लिए कहा। पंरतु सुमेर सिंह ने उच्च अधिकारियों के आदेश का हवाला देते हुए महेंद्र को वहां से जाने के लिए कहा। इस मुद्दे पर दोनों अधिकारियों में तीखी झड़प हो गई। धक्का लगने से सुमेर सिंह नीचे गिर गया और उसकी पीठ पर गहरी चोट लगी। इससे भन्नाए सुमेर सिंह ने भी महेंद्र के गाल पर तमाचा जड़ दिया। दोनों अधिकारियों के बीच यह विवाद भडक़ गया। जिसका फायदा उक्त अवैध निर्माण मालिक को हुआ और वह ईमारत टूटने से बच गई। पता चला है कि इस अवैध बिल्डिंग को बनवाने की एवज में निगम के ही एक अधिकारी ने लाखों रुपए लिए हैं। अब इस पूरे मामले में बिल्डिंग इंस्पेक्टर महेंद्र रावत की क्या भूमिका है और अपना क्षेत्र ना होते हुए भी वह उक्त बिल्डिंग को बचाने क्यों पहुंच गया, यह उच्च स्तरीय जांच का मामला है। हैरत की बात है कि इतना बड़ा विवाद होने व नगर निगम प्रशासन की छवि की धज्जियां उडऩे के बावजूद जहां उक्त ईमारत धड़ल्ले से बन रही है, वहीं दूसरी ओर किसी भी दोषी अधिकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई तक नहीं की गई है?
इस पूरे प्रकरण में निगम आयुक्त यश गर्ग की चुप्पी भी अपने आप में लोगों के लिए आश्चर्य का केंद्र बनी हुई है। जिस प्रकार से दो अधिकारियों की सरेआम सडक़ पर झड़प हुई, उससे साबित हो गया है कि नगर निगम अवैध निर्माणों का धंधा करने वाला एक सरकारी गिरोह बन गया है। जो भी अधिकारी तोडफ़ोड़ विभाग में नियुक्त होते हैं, वह कथित तौर पर इस काले उद्योग के हिस्सेदार बन जाते हैं। बकायदा अवैध निर्माणों के ठेके लिए व दिए जाते हैं। परंतु इस मामले में आयुक्त का आंखें बंद करके बैठ जाना हैरत अंगेज घटना कही जा रही है। आयुक्त यश गर्ग के पास लगातार अवैध निर्माणों की शिकायतें पहुंच रही हैं, मगर वह कार्रवाई करने की बजाए चुप बैठे हैं। चर्चा है कि आयुक्त की चुप्पी की वजह से अवैध निर्माणों का काला उद्योग दिन दुनी रात चौगुनी उन्नति कर रहा है। आखिर इसका लाभ किन किन अधिकारियों तक पहुंच रहा है, यह अब निष्पक्ष जांच का विषय बन गया है। भ्रष्टाचार रहित शासन देने वाली भाजपा सरकार तक भी अवैध निर्माणों के काले धंधे की हर जानकारी पहुंच रही है, मगर मुख्यमंत्री मनोहर लाल व निकाय मंत्री अनिल विज भी आंखें बंद करके बैठे हैं । लोगों का कहना है कि भाजपा के सुशासन की पोल उनके अपने अधिकारी व मंत्री ही खोल रहे हैं।


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