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Friday, March 6, 2020

प्रदेश में जल्द होंगे राज्यसभा की 3 सीटों पर चुनाव, 2 सीटें भाजपा और 1 कांग्रेस खाते में तय


Chandigarh News (Citymail News )  हरियाणा में राज्यसभा के लिए खाली तीनों सीटों पर एक ही दिन चुनाव होगा। दो सीटों के लिए आमचुनाव और एक सीट के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम अलग-अलग जारी हुआ, लेकिन तीनों सीटों का चुनाव शैड्यूल एक ही रहेगा। हालांकि तीनों सीटों के लिए वोटिंग अलग-अलग होगी।

 

लिहाजा तीन सीटों में से दो सीटें भाजपा और एक कांग्रेस खाते में तय, मानी जा रही है। चर्चा यह भी है कि चुनाव की बजाय सर्वसम्मति पर ज्यादा जोर रहेगा।

 

हरियाणा में दो सीटों पर नौ अप्रैल को कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें से एक सीट इनेलो टिकट पर राज्यसभा सांसद रहे रामकुमार कश्यप के इस्तीफा देने के कारण खाली हुई है। जबकि दूसरी सीट पर सांसद कुमारी सैलजा का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके साथ ही तीसरी सीट पर उप चुनाव होगा, क्योंकि पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद बीरेंद्र सिंह ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

 

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के पक्ष में वोटिंग की थी। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें इंद्री हलके से विधानसभा चुनाव लड़वाया। इंद्री से जीत हासिल करने के बाद रामकुमार ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

काबिलेगौर है कि बीरेंद्र सिंह वाली सीट का कार्यकाल एक अगस्त, 2022 तक के लिए है। ऐसे में इस सीट पर उपचुनाव होना है। उपचुनाव का कार्यक्रम पिछले दिनों ही जारी हुआ है। इससे पूर्व जारी किए गए आमचुनाव वाला शैड्यूल ही उपचुनाव के लिए होगा।

 

चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार, शुक्रवार से इन तीनों सीटों के लिए नामांकन-पत्र जमा करवाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। नामांकन-पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 13 मार्च तक है।

 

16 मार्च को नामांकन-पत्रों की छंटनी होगी और 18 मार्च नामांकन-पत्र वापस लेने की तारीख तय की गई है। अगर जरूरी हुआ, तो 26 मार्च को इन तीनों सीटों के लिए सुबह 9 बजे से शाम को 4 बजे तक वोटिंग होगी।

 

माना जा रहा है कि जिन दो सीटों पर आम चुनाव हो रहा है, उनमें से एक भाजपा-जेजेपी गठबंधन और दूसरी कांग्रेस के खाते में जानी तय है।

समझिए चुनावी रणनीति

 

90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट के लिए 31 विधायकों की वोट होना जरूरी है। भाजपा के पास खुद के 40 विधायक हैं। इसके अलावा जेजेपी के 10 और सात निर्दलीयों में से 6 निर्दलीय का भाजपा को समर्थन है। कांग्रेस के पास 31 विधायक हैं, ऐसे में दूसरी सीट पर कांग्रेस को किसी तरह का जोखिम नहीं रहेगा। बीरेंद्र सिंह वाली सीट के लिए अलग से चुनाव होगा, ऐसे में इस पर भी भाजपा-जेजेपी गठबंधन की जीत तय है।

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