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Friday, March 13, 2020

संतों के गुरूद्वारा की सोसायटी भंग, अमरजीत चावला को बाहर का रास्ता दिखाने पर लगा स्टे


Faridabad News (citymail news ) एनआईटी के प्रमुख संतों के गुरूद्वारे को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। यह मामला अब कानूनी दांव पेंच में बुरी तरह से उलझ गया है। जिला रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी ने गुरूद्वारे की सोसायटी को भंग करते हुए रिटायर जिला सेशन जज को सोसायटी का प्रशासक नियुक्त किया है। इसके साथ साथ रजिस्ट्रार ने शहर के जाने माने उद्योगपति एवं समाजसेवी अमरजीत चावला को सोसायटी से बाहर किए जाने पर भी स्टे लगा दिया है। यानि कि रजिस्ट्रार के आदेश के बाद श्री चावला गुरूद्वारा सोसायटी के ट्रस्टी बने रहेंगे।
बता दें कि संतों के गुरूद्वारा(डेरा संत भगत सिंह महाराज , बन्नूवाल मार्केट एनआईटी नंबर 1 फरीदाबाद)
की प्रबंधन कमेटी को लेकर पिछले काफी समय से जोरदार विवाद चला आ रहा है। पिछले दिनों सोसायटी ने एक आदेश जारी कर अमरजीत चावला को ट्रस्ट से बाहर कर दिया था। सोसायटी के इस आदेश के खिलाफ श्री चावला ने जिला रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी के समक्ष एक अपील दायर की। अमरजीत चावला की याचिका पर सुनवाई करते हुए रजिस्ट्रार अनिल चौधरी ने एक फैसला दिया। जिसमें सोसायटी को भंग करते हुए रिटायर जिला सेशन जज श्री एच.पी. सिंह को संतों का गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी का प्रशासक नियुक्त कर दिया। इसके साथ साथ रजिस्ट्रार ने अमरजीत चावला को ट्रस्ट से हटाने के आदेश पर भी रोक लगा दी। रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश के अनुसार सोसायटी को तीन महीने के भीतर चुनाव करवाने होंगे। इसके अलावा प्रदीप झांब व जगदीश रत्तरा की नियुक्ति को भी रद्द कर दिया गया है। रजिस्ट्रार के आदेशों के बाद से सोसायटी के अध्यक्ष मनोहर लाल व आईडी अरोड़ा के सभी अधिकार समाप्त माने जाएंगे। उल्लेखनीय है कि अमरजीत चावला जब से गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी से जुड़े हैं, तब से संतो के गुरूद्वारे की नई ईमारत को भव्य तरीके से बनाने का काम आरंभ हुआ है। अमरजीत चावला ने अपने रसूखों से गुरूद्वारे को भव्यता प्रदान करने के लिए खासी मेहनत की है। उनकी दिन रात की मेहनत के बाद पुराने ट्रस्टी व अन्य लोगों में असुरक्षा की भावना आ गई और देखते ही देखते वहां राजनीति का माहौल तैयार हो गया। जिसके बाद अमरजीत चावला को बाहर का रास्ता दिखाया गया। पंरतु चावला ने इस मामले को लेकर रजिस्ट्रार के समक्ष अपील दायर की ,जिसके बाद यह मामला कानूनी पचड़े में फंस गया। देखना अब यह है कि गुरूद्वारे की राजनीति निकट भविष्य में क्या गुल खिलाती है।






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