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Monday, March 2, 2020

MCF की हंगामेदार बैठक, विपक्षी सहित भाजपा पार्षदों ने भ्रष्टाचार पर अधिकारियों को किया नंगा


Faridabad News (citymail news ) बजट पारित करवाने को लेकर नगर निगम द्वारा बुलाई गई सदन की बैठक में उस समय अधिकारियों की जान मुसीबत में आ गई, जब अधिकांश पार्षदों ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जमकर उन पर अपनी भड़ास निकाली। आश्चर्य की बात तो यह रही कि सत्ताधारी दल भाजपा के पार्षदों ने भी विपक्षी दल के पार्षदों के साथ नगर निगम के अधिकारियों को भ्रष्टाचार पर जमकर घेरा। भाजपा और विपक्ष के पार्षदों ने सदन की भरी बैठक में हंगामा करते हुए फाईनेंस व इंजीनियरिंग ब्रांच के अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई। 6 महीने बाद सदन की बैठक होने पर भी पार्षद खासे नाराज दिखाई दिए।
बैठक की अध्यक्षता मेयर सुमनबाला ने की। बैठक में सीनियर डिप्टी मेयर एवं केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के पुत्र देवेंद्र चौधरी ने भी भ्रष्टाचार पर अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर की। नगर निगम की बैठक में जिस प्रकार से विपक्षी पार्षदों के साथ साथ सत्ताधारी दल भाजपा के पार्षदों ने भ्रष्टाचार को लेकर आरोप लगाए, उससे यह तो साबित हो गया है कि भाजपा सरकार की भ्रष्टाचार रहित प्रशासन देने का वायदा टांय-टांय फिस्स हो गया है। भाजपा पार्षदों द्वारा जिस प्रकार अधिकारियों को लताड़ लगाई गई, इससे यह भी सिद्व हो गया कि भ्रष्टाचार से आम आदमी ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी भी खासे दुखी हैं। नगर निगम सदन की बैठक में भ्रष्टाचार पर शोर मचाते पार्षदों को देखकर आयुक्त यश गर्ग चुपचाप बैठे रहे। कई मुद्दों आयुक्त ने पार्षदों के आरोपों पर सहमत होते हुए पूरी व्यवस्था को सुधारने का आश्वासन दिया । डिप्टी मेयर मनमोहन गर्ग ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की और पार्षदों का साथ दिया। बैठक शुरू होते ही पार्षद दीपक चौधरी ने नगर निगम को सोमनाथ का मंदिर बताते हुए अधिकारियों पर उसे लूटने का आरोप लगाया । 200 करोड़ रुपए की अमृत योजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए। कांग्रेस पार्षद राकेश भड़ाना भी अधिकारियों पर खूब गरजे।


बिल्लू पहलवान, नरेश नंबरदार, अजय बैसला, गीता रक्षवाल, ललिता, सुमन भारती, सुरेंद्र अग्रवाल, मनोज नासवा, जयबीर खटाना, मनोज नासवा व सुभाष आहुजा सहित अधिकांश पार्षदों ने विकास कार्यों के लिए आने वाले फंड में बंदरबांट पर जमकर भड़ास निकाली। पार्षदों ने कहा कि ठेकेदारों से बीस प्रतिशत कमीशन मांगा जाता है। जो ठेकेदार यह रिश्वत देता है, उसका भुगतान होता है, बाकि चक्कर लगाते रहते हैं। इस तरह से घंटों तक हुई नगर निगम सदन की बैठक के अंत में पार्षदों ने ना चाहते हुए भी 2394 करोड़ रुपए का बजट पारित कर दिया। बैठक में निगम आयुक्त ने सभी पार्षदों को आश्वासन दिया कि वह एक करोड़ रुपए तक के कार्य अपनी मर्जी से करवा सकेंगे। इसके लिए सभी ज्वाइंट कमिश्नर को आदेश जारी कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी कोई दिक्कत हो तो पार्षद उनसे सीधे मिलकर अपनी समस्या बता सकते हैं।


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