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Friday, May 8, 2020

कोरोना व लॉकडाऊन में धारा 144 लागू, फिर भी सडक़ों पर उतर आए सैंकड़ों कर्मचारी


Faridabad News (citymail news ) सरकार के खिलाफ सडक़ों पर कर्मचारी उतर आए हैं। इससे राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कर्मचारी अपनी मांगों को ना मानने से खफा हैं। जबकि इस समय फरीदाबाद में लॉकडाऊन के चलते धारा 144 लागू हैं। इसके तहत कहीं भी चार या उससे अधिक लोगों के इकठ्ठे होने की मनाही है। मगर ये कर्मचारी सैंकड़ों की संख्या में सडक़ों पर उतर आए हैं। इससे कानून व्यवस्था को खासा नुक्सान पहुंच सकता है। इनके इकठ्ठे होने से कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना भी हो सकती है। बेशक इनकी मांगे जायज हो सकती हैं, मगर यह माहौल प्रदर्शन करने की बजाए दो या तीन लोग एक ज्ञापन के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचा सकते थे, मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। देखते है आखिर इन कर्मचारियों का कहना क्या है। 
कोरोना योद्धाओं को सुरक्षा उपकरण न देने, महंगाई भत्ते व एलटीसी पर लगाई रोक से गुस्साए कर्मचारियों ने शुक्रवार को अपने अपने विभागों में प्रर्दशन किए। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत शुक्रवार को नगर निगम, बिजली निगम, टूरिज्म,जन स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) सिंचाई, शिक्षा,हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, वन आदि विभागों में प्रर्दशन किए गए। प्रदर्शनों में शारीरिक दूरी के नियमों का कड़ाई से पालन किया गया। प्रर्दशनों के बाद सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को संबोधित 8 सूत्री मांग पत्र उपायुक्त यशपाल यादव को उनके आवास पर पहुंच कर सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री, जिला प्रधान अशोक कुमार, सचिव बलबीर सिंह बालगुहेर व कोषाध्यक्ष युद्धवीर सिंह खत्री शामिल थे। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने इससे पहले नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन में बोलते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि अगर सरकार ने  प्रदर्शनों के बावजूद डीए बढ़ोतरी व एलटीसी पर लगाई रोक को वापस नहीं लिया और बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया तो लाकडाउन के बाद आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने बड़े पूंजीपतियों के लाखों करोड़ रुपए के सरकारी बैंकों के लोन माफ करने और कोरोना योद्धाओं के वेतन भत्तों में कटौती करने की घोर निन्दा की। 

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